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अध्याय 3: स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र (Terrestrial Ecosystem)

 पारिस्थितिकी तंत्र (Terrestrial Ecosystem)

स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र को वहां पाए जाने वाले तापमान और वर्षा के आधार पर विभिन्न प्रकारों में विभाजित किया जाता है, जिन्हें बायोम (Biomes) कहा जाता है। पीडीएफ के अनुसार इसके मुख्य भाग निम्नलिखित हैं:

1. टुंड्रा बायोम (Tundra Biome)

  • अर्थ: टुंड्रा का अर्थ होता है “बंजर भूमि” या “वृक्षविहीन क्षेत्र”।

  • क्षेत्र: यह अत्यधिक ठंडे क्षेत्रों (ध्रुवीय क्षेत्रों और बहुत ऊंचे पर्वतों) में पाया जाता है।

  • जलवायु: यहाँ वर्ष के अधिकांश समय बर्फ जमी रहती है। मिट्टी की निचली परत स्थायी रूप से जमी होती है, जिसे पर्माफ्रॉस्ट (Permafrost) कहते हैं।

  • वनस्पति: अत्यधिक ठंड के कारण यहाँ बड़े पेड़ नहीं उग पाते। मुख्य रूप से लाइकेन (Lichens), काई (Mosses) और छोटे सेज (Sedges) पाए जाते हैं।

  • जीव-जंतु: यहाँ के जीवों में ठंड से बचने के लिए मोटी त्वचा या फर होता है (जैसे- कस्तूरी बैल, रेनडियर, ध्रुवीय भालू, और आर्कटिक लोमड़ी)।

2. टैगा या बोरियल वन बायोम (Taiga or Boreal Forest Biome)

  • जलवायु: टुंड्रा के ठीक नीचे का क्षेत्र। यहाँ सर्दियाँ बहुत लंबी और ठंडी होती हैं, लेकिन गर्मियां छोटी होती हैं।

  • वनस्पति: इस बायोम की मुख्य विशेषता शंकुधारी वन (Coniferous Forests) हैं। यहाँ के पेड़ों की पत्तियां सुई जैसी नुकीली और मोम जैसी परत वाली होती हैं ताकि बर्फ आसानी से फिसल सके।

  • प्रमुख पेड़: पाइन (Pine), स्प्रूस (Spruce), फर (Fir) और लार्च (Larch)।

  • जीव-जंतु: साइबेरियाई कस्तूरी मृग, मिंक, लिंक्स और भेड़िया।

3. शीतोष्ण पर्णपाती वन बायोम (Temperate Deciduous Forest Biome)

  • जलवायु: यहाँ मध्यम तापमान और पूरे वर्ष समान रूप से वर्षा होती है। यहाँ चार स्पष्ट ऋतुएँ (सर्दियाँ, गर्मियां, वसंत, शरद) पाई जाती हैं।

  • वनस्पति: इन वनों के पेड़ सर्दियों के मौसम में अपनी पत्तियां गिरा देते हैं (ताकि पानी की कमी से बचा जा सके)।

  • प्रमुख पेड़: ओक (Oak), बीच (Beech), मेपल (Maple) और हिकरी।

4. उष्णकटिबंधीय वर्षावन बायोम (Tropical Rain Forest Biome)

(यह यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण स्थलीय बायोम है)

  • क्षेत्र: भूमध्य रेखा (Equator) के पास (जैसे- अमेज़न बेसिन, कांगो बेसिन और भारत के पश्चिमी घाट)।

  • जलवायु: पूरे वर्ष अत्यधिक गर्मी और भारी वर्षा (200 सेमी से अधिक) होती है। यहाँ कोई स्पष्ट शुष्क मौसम नहीं होता।

  • वनस्पति की विशेषताएं: 1. अत्यधिक जैव विविधता: दुनिया की 50% से अधिक प्रजातियां यहीं पाई जाती हैं। 2. कैनोपी (Canopy/वितान): पेड़ बहुत ऊंचे और घने होते हैं, जिससे ऊपर एक ‘छत’ जैसी बन जाती है और सूर्य का प्रकाश जमीन तक नहीं पहुँच पाता। 3. स्तर विन्यास (Stratification): वनस्पतियां कई परतों में बंटी होती हैं (झाड़ियाँ, छोटे पेड़, फिर बहुत ऊंचे पेड़)। 4. एपीफाइट्स (Epiphytes/अधिपादप): ऐसे पौधे जो दूसरे पेड़ों पर केवल सहारे के लिए उगते हैं (जैसे- ऑर्किड)।

  • जीव-जंतु: जगुआर, बंदर, रंग-बिरंगे पक्षी, और अनगिनत प्रकार के कीड़े-मकोड़े।

5. सवाना या उष्णकटिबंधीय घास के मैदान (Savanna / Tropical Grassland)

  • जलवायु: यहाँ एक स्पष्ट गीला (Wet) और एक लंबा सूखा (Dry) मौसम होता है। वर्षा मध्यम होती है।

  • वनस्पति: यह बायोम बड़े घास के मैदानों और दूर-दूर उगे बिखरे हुए पेड़ों के लिए जाना जाता है। यहाँ की घास बहुत लंबी और सख्त होती है (जिसे ‘हाथी घास’ या Elephant Grass भी कहते हैं)।

  • जीव-जंतु: इसे “बिग गेम कंट्री” (Big Game Country) भी कहा जाता है, क्योंकि यहाँ बड़े शाकाहारी (जिराफ़, ज़ेबरा, हाथी) और मांसाहारी (शेर, चीता) भारी संख्या में पाए जाते हैं।

6. मरुस्थल या रेगिस्तान बायोम (Desert Biome)

  • जलवायु: अत्यंत कम वर्षा (25 सेमी से कम) और अत्यधिक तापमान (दिन बहुत गर्म और रातें बहुत ठंडी)।

  • वनस्पति की अनुकूलता (Xerophytic Adaptation):

    • पानी बचाने के लिए पौधों की पत्तियां कांटों में बदल जाती हैं

    • तना मोटा और गूदेदार हो जाता है ताकि पानी जमा किया जा सके (जैसे कैक्टस)।

    • जड़ें पानी की तलाश में जमीन के बहुत नीचे तक जाती हैं।

  • जीव-जंतु: ऊँट, कंगारू चूहा (जो बिना पानी पिए पूरे जीवन रह सकता है), और विभिन्न प्रकार के रेंगने वाले जीव।

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