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‘नागोया प्रोटोकॉल’ (Nagoya Protocol)
नागोया प्रोटोकॉल (Nagoya Protocol) जैव विविधता (Biodiversity) के संरक्षण से संबंधित एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समझौता है। इसका उद्देश्य आनुवंशिक संसाधनों (Genetic Resources) के उपयोग से प्राप्त होने वाले लाभों (Benefits) का न्यायसंगत एवं समान (Fair and Equitable) बंटवारा सुनिश्चित करना है। इसे 29 अक्टूबर 2010 को जापान के Nagoya शहर में आयोजित Conference of the Parties to the Convention on Biological Diversity (COP 10) के दौरान अपनाया गया था। यह 12 अक्टूबर 2014 से प्रभावी (Entered into Force) हुआ।
1. लाभों का न्यायसंगत बंटवारा (Access and Benefit Sharing – ABS)
- आनुवंशिक संसाधनों के उपयोग से होने वाले आर्थिक एवं गैर-आर्थिक लाभों का उचित वितरण।
- लाभ उस देश और स्थानीय समुदाय को भी मिले जहाँ से संसाधन प्राप्त हुए।
2. जैव विविधता का संरक्षण
- संसाधनों का अंधाधुंध दोहन रोकना।
- जैव विविधता के संरक्षण को बढ़ावा देना।
3. जैव संसाधनों का सतत उपयोग
- भविष्य की पीढ़ियों के लिए संसाधनों को सुरक्षित रखना।
महत्व (Importance)
- जैव चोरी (Biopiracy) रोकता है।
- स्थानीय समुदायों के अधिकारों की रक्षा करता है।
- जैव विविधता संरक्षण को प्रोत्साहित करता है।
- सतत विकास (Sustainable Development) को बढ़ावा देता है।
- विकासशील देशों को आर्थिक लाभ दिलाता है।
सीमाएँ (Limitations)
- सभी देशों ने इसे स्वीकार नहीं किया है।
- अनुपालन की निगरानी कठिन है।
- डिजिटल आनुवंशिक जानकारी (Digital Sequence Information – DSI) पर लंबे समय तक स्पष्ट नियम नहीं थे।
- कई देशों में प्रशासनिक क्षमता सीमित है।