न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP – Minimum Support Price)
न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) वह मूल्य है जिस पर सरकार किसानों से उनकी फसल खरीदने की गारंटी देती है, ताकि बाजार में कीमतें गिरने की स्थिति में भी किसानों को उनकी उपज का न्यूनतम लाभकारी मूल्य मिल सके।
MSP कौन घोषित करता है?
- भारत सरकार MSP घोषित करती है।
- इसकी सिफारिश कृषि लागत एवं मूल्य आयोग ( CACP ) द्वारा की जाती है।
- MSP की घोषणा प्रत्येक वर्ष खरीफ और रबी मौसम से पहले की जाती है।
उद्देश्य
- किसानों को मूल्य में गिरावट से सुरक्षा प्रदान करना।
- किसानों को उचित आय सुनिश्चित करना।
- खाद्यान्न उत्पादन को प्रोत्साहित करना।
- देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना।
- फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना।
MSP किन फसलों के लिए घोषित किया जाता है?
वर्तमान में 23 फसलों के लिए MSP घोषित किया जाता है:
1. अनाज (7)
- धान
- गेहूँ
- मक्का
- ज्वार
- बाजरा
- रागी
- जौ
2. दलहन (5)
- चना
- अरहर
- मूंग
- उड़द
- मसूर
3. तिलहन (7)
- मूंगफली
- सोयाबीन
- सरसों
- सूरजमुखी
- तिल
- कुसुम
- नाइजर बीज
4. वाणिज्यिक फसलें (4)
- कपास
- गन्ना*
- जूट
- खोपरा (Copra)
ध्यान दें: गन्ने के लिए MSP नहीं बल्कि Fair and Remunerative Price (FRP) निर्धारित किया जाता है।
MSP का निर्धारण किन कारकों के आधार पर होता है?
CACP निम्नलिखित बातों पर विचार करता है:
- उत्पादन लागत (A2 + FL तथा C2 लागत)
- मांग और आपूर्ति
- घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कीमतें
- बाजार मूल्य प्रवृत्तियाँ
- किसानों और उपभोक्ताओं के हित
- कृषि और गैर-कृषि क्षेत्रों के बीच व्यापार की शर्तें
स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश
एम. एस. स्वामीनाथन आयोग ने सिफारिश की थी कि:
MSP = C2 लागत + 50% लाभ
हालांकि, सरकार MSP की गणना मुख्यतः A2 + FL लागत के आधार पर करती है और उस पर कम-से-कम 50% लाभ सुनिश्चित करने का दावा करती है।
MSP से संबंधित प्रमुख समस्याएँ
- सभी फसलों की सरकारी खरीद नहीं होती।
- खरीद मुख्यतः गेहूँ और धान तक सीमित रहती है।
- कुछ राज्यों (पंजाब, हरियाणा आदि) को अधिक लाभ मिलता है।
- जल-गहन फसलों को बढ़ावा मिलने से पर्यावरणीय समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।
- भंडारण और वितरण की लागत बढ़ती है।